भारत के विभिन्न प्रांतो में कायस्थ महापरिवार के सदस्य के नाम

दस करोड का कायस्थ महापरिवार आज भारत तथा विश्व के कोने-कोने में विभिन्न नामों से जाना जाता है। समय के साथ देश के‍ विभिन्न प्रान्तों में देश और काल की परिस्थिति के अनुसार विशेष परिस्थितियों में नामों में परिवर्तन तो हुआ है परन्तु सभी कायस्थ या चित्रांश बन्धु अपने को भगवान श्री चित्रगुप्त जी की संतान ही मानते है। और हमें इस बात पर गर्व अनुभव करना चाहिए कि हम ग्यारह करोड के इस विशाल परिवार जग गया और संगठित हो गया उसी दिन इस महापरिवार की दशा और दिशा में आमूल परिवर्तन हो जायेगा।


      उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभिन्न प्रान्तों में चित्रांश बन्धुओं के जो उपनाम हैं, वे निम्न प्रकार हैं।      
1.     उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड और छत्तीसगढ- श्रीवास्तव, सूरजध्वज, अष्ठाना, बाल्मीकि, माथुर, गौड, भटनागर, सक्सेना, अम्बष्ठ, निगम, कर्ण और कुन श्रेष्ठ।
2.     बंगाल- बोस(वसु), संन, कार, दास, पालित, दत्त, सेनगुप्त, चन्द्र, भद्रधर, नन्दी, घोष, मल्लिक (मलिक), दासमुंशी, डे, मुंशी, पाल, र(राय), गुहा, वैद्य, नाग, करणादि, कुंद, सोम, सिन्हा, रक्षित, मित्रा, नन्दन, विश्वास, सरकार, चौधरी, बर्मन, गुप्त, मृत्युंजय, दत्ता, कुन्डू मित्र, धर, शर्मन, भद्र, अम्हा, पुरकायस्थ, मजूमदार।
3.     उडीसा- पटपायक, कानूनगो, दास, बोहियार, मोहन्ती, पाटस्कर।
4.     त्रिपुरा- देव।
5.     असम- बरूआ, पुरकायस्थ, वैद्य, कलित।
6.     गुजरात-चन्द्रसेनी कायस्थ, प्रभु, मेहता, बल्लभ जी, वाल्मीकि, बल्लभी, सूरजध्वज।
7.     दक्षिण भारत- मुदालियार, नायडू, पिल्ले (पिल्लई), रेडडी, लाल, कार्णिक, रमन, राव, रढडा, करनाम, लाल।
8.     गोवा-दमन-दीव- दवणे, कोकेण, पठारे आदि।
9.     सिन्ध प्रान्त- आलिम, फाजिल, कामिल, आडवानी, मलकानी।
10.     पंजाब- गोविल, लहरी, हजेला, रायजादा, विद्यार्थी, चौधरी, जौहरी, रावत, विसारिया, सिन्हा, नागपाल, कांडपाल, कश्यप, बख्शी, दत्त, मित्र, राय।
11.     राजस्थान-गौड, पंचौली, भैया, गुत्तू, सर्भन, फुत्तू, सम्भव, शास्त्री, प्रसाद।
12.     तमिलनाडु- तामिल, कनारा, कायस्थ।
13.     तकलगूदेशम- तेलगू, कायस्थ।
14.     महाराष्ट्र- ठाकरे, पठारे, पाठेकर, चन्द्रसेनी, कारखानीरा, फरणीस, पोलनीस, वनीस, हजीरनीश, मौकासी, चिटणवीस, कोटनिस, प्रभु, चित्रे, गुप्ते, मथरे, देशपाण्डे, करोडे, दोदे, तम्हणे, दिघे, सुले, राजे, सांग्ले, मोहिते, तुंगारे, फर्णसे, आपटे, घडदिये, गडकारी, कुलकर्णी, श्रौफ, शांगलू(भांगले), जयवन्त, समर्थ, दलवी, देशमुख, चौवाल, वमन राजे, त्रिवंकराजे, अधिकारी, जयवंश, गडकर, दवेलकर, वोमनकर, कुलवाकर, औतारवार, खरूलकर, विडवालकर, मेढकर, खाडिलकर समर्थ।
15.     नेपाल- श्रेष्ठ, वैद्य, सिन्हा।

आँधी लघु-लघु दीप बुझाती, पर धधकाती है दावानल।
कोटि कोटि ह्रदयों की ज्वाला, कौन बुझाए किसमें बल।।

जब तक लक्ष्य न पूरा होगा, तब तक पग की गति न रूके।
आज कहे चाहे कुछ दुनिया, कल को झुके बिना न रहे भी।।